माज़ी-परस्ती (Nostalgia)
कर ली बातें चाँद सितारों से,मिल आये ज़िगरी यारों से, कूदना पेड़ों से तालाबों में,पायलट बनना वो ख्वाबों में, जी आये वो बेखबरी भी, वो मस्ती भी,ख़ूब शग़ल है यारों ये माज़ी-परस्ती भी. © Sunil Chauhan
कर ली बातें चाँद सितारों से,मिल आये ज़िगरी यारों से, कूदना पेड़ों से तालाबों में,पायलट बनना वो ख्वाबों में, जी आये वो बेखबरी भी, वो मस्ती भी,ख़ूब शग़ल है यारों ये माज़ी-परस्ती भी. © Sunil Chauhan
जब से भइल बा टिकटवा हो गांव के,याद आवता जमुनिआ के छाँव के. बाग़ बगइचा, खटिया मचिया, ताल तलइया बांगर दियरा,मॉल, फ्लैट, डनलप के गद्दा, कवनो ना एहनी के नियरा,लाली बिलाली, गुल्ली डान्टा, लट्टू, कबड्डी, चीकाटेनिस, गोल्फ, बिलियर्ड्स सब एकनी के आगे फीका. खूब शान बा शहरिया के लेकिन,इ त Read more
किसी नदी/पोखरी के किनारेछोटी पुलिया/बरगद केचबूतरों पर बैठे बिनापकड़ पतंगों की डोरदौड़ लगाएं बिना यातितलियों के पीछे बिन भागें। सरसों के खेतों में,किसी मोती, झबरा,या शेरू के साथ बिनालुकाछिपी का खेल खेलें। या संझवत के शुरू होते ही,झींगुरों के मधुर संगीतसे अगर तुम हो वंचिततो, विश्वास करों मेरे दोस्ततुमने सिर्फ Read more
मिल जाये उनको जिनको आफ़ाक़ सारा चाहिए,तुम ही हो दुनिया मेरी बस साथ तुम्हारा चाहिए ग़र पक्का है एतमाद तो वो सुन ही लेगाबस तबीयत से उसका नाम पुकारा चाहिए © Sunil Chauhan
जब ग़म के बादल छाये होंदुखियारे दिन आये होंजब दुनिया ने मुख मोड़ लियासब अपनों ने नाता तोड़ लियाखुशियों ने आँखें फेरी होंइक बार कहो तुम मेरी हो छोड़ दी मैंने दुनिया सारीबस तेरे ख़ातिर ओ प्यारीकरते फ़रियाद सदसाल हुएउम्मीद में अब बदहाल हुएक्यूँ इन्साफ में इतनी देरी होइक बार Read more
मित्र बिना हैं सब रस फीके, माल मुलक सब सूना, दुख को पल में आधा कर दे, खुशियाँ कर दे दूना। © Sunil Chauhan
मुसाफ़िर हूँ यारों, मुझे चलते जाना है,चलना ही दीन मेरा, रस्ते को ख़ुदा माना है मुकाम हो मुकर्रर तो लुत्फ क्या डगर का,बेमज़ा सफर है, जब पता हो कहाँ जाना है आलिम नहीं मैं कोई, पर इतना, मैंने जाना है,चलना ही ज़िन्दगी है,मन्ज़िल तो रुक जाना है। © Sunil Chauhan
प्रत्येक भवनों, बसों, रेलगाड़ियों व हेलिकॉप्टरों में होती हैं खिड़की जिसके द्वारा, हम देख सकते हैं भविष्य को, सुंदर प्राकृतिक नजारों को। और फिर,बाड़ की भीषण विभिषिकाओं को देखने को भी तो चाहिए होती हैं एक खिड़की जिससे हम दौरों के दौरान देखते हैं लाचार व हैरान मौन व वाचाल Read more
जब हम किसी पौधे को लगाते हैं और जब हम किसी पौधें को काटते हैं तब भी जब हम किसी रोते को हंसाते हैं और जब हम किसी को रूलाते हैं तब भी जब हम कुछ अच्छा करते हैं और जब हम कुछ बुरा करते हैं तब भी यहां तक Read more