काम हो जाने पर भूल जाना, ये दस्तूर है पुराना
फिर भी काम करते रहना, शायद मिलेगा कोई खजाना
दो चीजे नहीं भूलती, चाहे कितना भी भुलाओ
एक होता है घाव , और दूसरा है लगाव
जो भूलना चाहिए , वो रह जाता है याद
शायद इसलीये तो हो जाते है विवाद
तकलीफ देने वाले को एक वक्त भूल जाना
लेकिन तकलीफ मे साथ देने वाले को कभी मत भूलना
© अजित भा. खाडीलकर (९९२२२१६००७)
1 Comment
Sunil Chauhan · January 25, 2026 at 5:40 am
कचरा सब बिसराय के बच जाए वो भला है
मुश्किल तो है मगर भूल जाना एक कला है