फरामोश
काम हो जाने पर भूल जाना, ये दस्तूर है पुरानाफिर भी काम करते रहना, शायद मिलेगा कोई खजाना दो चीजे नहीं भूलती, चाहे कितना भी भुलाओएक होता है घाव , और दूसरा है लगाव जो भूलना चाहिए , वो रह जाता है यादशायद इसलीये तो हो जाते है विवाद तकलीफ Read more
काम हो जाने पर भूल जाना, ये दस्तूर है पुरानाफिर भी काम करते रहना, शायद मिलेगा कोई खजाना दो चीजे नहीं भूलती, चाहे कितना भी भुलाओएक होता है घाव , और दूसरा है लगाव जो भूलना चाहिए , वो रह जाता है यादशायद इसलीये तो हो जाते है विवाद तकलीफ Read more
नज़र अगर हो नेक, तो मिल जाता है साहिल, खुद में झाँको तो पता चलता है तुम ही हो सबसे क़ाबिल।। जो बात ज़ुबान न कह सकी, वो नज़रों ने कह डाली, ज़िंदगी में एक फूल के अक्सर होते हैं दो माली।। नज़र बदल के देखो, नज़ारे बदल जाएँगे, नज़रअंदाज़ Read more
अपने ही अक्सर करते है, अपनोंका अपमान ।भुलादेके आगे बढना, ये रखो आपकी पहचान ॥ सुख दुख के समुंदर मे बहती है जीवन की नैय्या ।कश्ती वो डुबती नहीं, जिसे आशिर्वाद देनेवाली होती है मैय्या ॥ क्रोध, लोभ, मत्सर से मिलती है सिर्फ वेदना ।शांती, संयम, समझदारी हो तो सफल Read more
जीवन के सफर को जारी रखियेमरने की भी मगर तैयारी रखिये दिल से काम लीजे दिमाग़ से नहींसर को ना इतना भारी रखिये वक़्त आने पे मिल ही जायेगाइतनी भी ना बेकरारी रखिये बेवफ़ा है वो तो बेवफ़ा ही सहीआप अपनी तो वफ़ादारी रखिये हस्र में सवाल टेढ़े भी पूछे Read more
रोज रोज नींद से जो जागते हैं हमसपना ग़र टूटे तो करते नहीं हैं ग़म फिर सपना देखते हैं जागते हुए हमउसके पीछे बेतहाशा भागते हैं हम सोते हुए से जागे पाया था कुछ नहींजागे हुए से जागेंगे पाएंगे कुछ नहीं सपने तो सपने हैं जागे के या सोये केसच Read more
पक्का है जब भरोसा परवरदिगार मेंखुश इस दयार में खुश उस दयार में हम हैं राही प्यार के चलते हैं मस्ती मेंफूल बिछे रस्ते में या राह-ए-पुरखार मे जब अपनी कश्ती का नाख़ुदा ख़ुदा हैडरें क्यूँ भवसागर के भाटा में ज्वार में हमने दिल से दिल का किया है सौदासूद Read more
होता है जो वो ग़र तेरी मर्जी हैये बुराई अच्छाई सब फर्जी है नकली है प्यार नफ़रत बेमानीपरोपकार झूठा झूठी खुदगर्जी है मढ़ के नेकी बदी उस के नामक्या हम सब करते मनमर्जी हैं? © सुनील चौहान
रुपिया के माला फेरल जाताधराई ना लेकिन घेरल जाता जे भरमल माया के जंजाल मेंओके ऊख जइसन पेरल जाता जे अँखिये के सोझवा खाड़ा बाओके दुनिया भर में हेरल जाता ख़ुशी के त अकाल बा लेकिनमुँह पर मुस्कान लभेरल जाता अपने से केहू डेरात नइखेझूठहिं आँख तरेरल जाता © सुनील Read more
काश! समझ लेता हर कोई, यहाँमोहब्बत, दर्द के सिवा कुछ भी नहींदर्द के खारा जल को भी पीना पड़ताखुद को खोने के सिवा, कुछ भी नहीं उस रास्ते पर चलने को मुड़ते हैं कदमजहाँ शूलों के सिवा और कुछ भी नहीं अंतर्मन से आवाज़ आती है, मीठी सीसमझा तो, गरल Read more
चीकन देहियाँ सीसा जइसन चमके चकाचकमनवाँ से कूड़ा करकट खर पतवार ना गइल घर संसार छोड़ि के चलि गइनी एकांत मेंमन से लेकिन कबहुँ गाँव बाज़ार ना गइल उखी बिखी लागल रहे जियरा रहे अशांतजबले अभिलाषा मनसा के भरमार ना गइल सुरुजे के खोज तानी दिया बाती बारि केभरल दुपहरिया Read more