वह एक दौर था
एक दौर थाजब छोटे , बड़ों काचरण स्पर्श करते थे,बड़ों का आशीर्वाद मिलता था,“दीर्घायु भव”… संस्कारकुछ ऐसा आज भी हैसिर्फ प्रथा बदल गई है… आज छोटे, बड़ों केचरण स्पर्श से कतराते हैंबड़े उन्हें गले से लगाकरकहते हैं “यशस्वी भव”… बड़ों Read more
एक दौर थाजब छोटे , बड़ों काचरण स्पर्श करते थे,बड़ों का आशीर्वाद मिलता था,“दीर्घायु भव”… संस्कारकुछ ऐसा आज भी हैसिर्फ प्रथा बदल गई है… आज छोटे, बड़ों केचरण स्पर्श से कतराते हैंबड़े उन्हें गले से लगाकरकहते हैं “यशस्वी भव”… बड़ों Read more
गगन तले , मुक्त हवा मेंगुज़रती ज़िंदगी जाने कबउन्मुक्त होकर , निर्भिक सीउड़ने लगी, हो पंख विहीन… विराट विश्व में एकाकीतन्मयता से ढूँढ़ रही थीअपने ही जैसी संगीहीना ,मिली ज़िंदगी, शब्दहीन… पाथेय नहीं है संग मगरहै आनंद से भरा मन Read more
मेरे एहसासों कामुझसे अचानकयूँही ख़फ़ा हो जानाकहीं न कहीं चुभनदे जाते हैं दिल को… स्पंदन के बिनासूने दिल का साथख़लिश सी बिखेरती हैख़्वाब अनमने सेदस्तक दे जाते हैं दिल को… टूटकर जुड़ते हुएबहुत कम देखा है,सिलवटों का रह जाना,नया ज़ख़्म Read more
खुशियाँ ढूँढ़कर थक गए थे हमबाज़ारों में खरीदने की कोशिश की,मगर नाकामयाब रहे… इतना तो पता थाज़िंदगी के गुज़र बसर के लिएखुशियाँ जरुरी है,मगर कभी हासिल नहीं हुई… एक दिन यूँ ही, घर से निकल करबेख़्याली में चलते चलतेगली के Read more
रिश्तों की अहमियत जाने बगैररिश्तों में ज़हर घोल लेते हैं लोग बुनियादी मज़बूती समझने से पहलेबेवजह फ़ैसले कर लेते हैं लोग… जुड़ने से पहले ही टूटने वाले रिश्तेवाकई कमज़ोर धागों में पिरोये होते हैं … हाथों की लकीरों को परखने Read more
ज़िंदगी को भरपूरजीने के लिएज़िंदादिल होकरजीना बहुत जरुरी है… ये और बात है किरोज़मर्रा जीने के लिएअनेकों सवालों के जवाबकई बार हासिल नहीं होते… गर्म रेत की तरहचटखता है दिल में गुबारबर्फ़ सी होती ज़िंदगी मेंधुँआ भी तो उठता है Read more
बेशकीमती बूँदों कोअब और न ज़ाया करो।चुपके चुपके राज़ ए दर्ददिल में न छुपाया करो… कौन जाने फिर से कबचलने लगे बसंती हवा।झूठ मूठ के वादों से अबदिल को न बहलाया करो… चाहत की परछाई धुंधली होतीदिल की फितरत होती Read more
रंग गुलालों के मौसम नेढ़ेरों खुशियाँ लायी है ।पतझड़ देते है संदेशेफागुन की ऋतु आयी है।।पेड़ों पर पत्तों के किसलयकोंपल बन कर आयी है।मनमोहक ऋतुराज यहाँ हैमादकता भी छायी हैआम्र के बौरों और महुआ कागंध यहाँ खींच लायी है।पतझड़…………….। फाल्गुन Read more
आँखों ही आँखों में मुलाक़ात हो जाती हैजुबाँ खुलती भी नहीं मगर बात हो जाती है. बैठे रहते हैं यूँ ही तेरा तसव्वुर किये हुएजाने कब दिन आता है कब रात हो जाती है ग़ैरमुमकिन है कहीं और शिक़स्त खा Read more
बलि राजा के रजधानी, तपसी के तप आधार,अनोखा बलिया जिला हमार। दरदर के पावन धरती पर, भृगु जी धइले पाँव,कोटि चौरासी मुनिगन आ के, घुमलन गाँवे-गाँव,फलित ज्योतिष के निरनय भइले, भृगु संहिता आधार।अनोखा बलिया जिला हमार। व्यालिस के जनक्राँति के, Read more