पिता
पिता ,सिर्फ शब्द नहींएक घनेरी छाँव है,वज़नदार एहसास है… पिता ,जिनकी उंगलियों सेमिला उंगलियों कोएक उष्मीय स्पर्शडगमगाते कदमों कोदी मज़बूती ,चलना सिखलाया… पिता ,आँखों से बहतेझर झर आँसुओं को रोके,दे होंठों कोमधुर मुस्कान… पिता ,बाहों में जिसकीहै फौलादी ताक़तढाल बनकर Read more









