अपने ही अक्सर करते है, अपनोंका अपमान ।
भुलादेके आगे बढना, ये रखो आपकी पहचान ॥
सुख दुख के समुंदर मे बहती है जीवन की नैय्या ।
कश्ती वो डुबती नहीं, जिसे आशिर्वाद देनेवाली होती है मैय्या ॥
क्रोध, लोभ, मत्सर से मिलती है सिर्फ वेदना ।
शांती, संयम, समझदारी हो तो सफल होगी मनोकामना ॥
कुदरत के आगे नरमाई से पेश आना होता है बेहतर ।
जिंदगी मे आना, जाना तो लगा रहेगा निरंतर ॥
याद रखो एक छोटीसी बात, आस्था और वास्ता तुम्ही हो
जीवन मे हर मुश्कील का रास्ता तुम ही हो ॥
© अजित भा. खाडीलकर
1 Comment
navanath · August 20, 2025 at 2:12 pm
great poem