freedom

खुली हवा में साँस

खुली हवा में साँस लेने का सुखउस कबूतर से पूछोजो पिजड़े में कभी कैद न हो ।मुक्त गगन में दम्भ भरता हैउड़ने की कलाबाज़ी दिखाता हैनजदीक से इंद्रधनुष छूकरलौटने पर इतराता है ।पर कितना कठिन हैखुशी-खुशी सुहागिनों को अपनी मांग अपने हाथों पोंछना ।चूड़ियों को बेरहमी से फोड़ना । कितना Read more

girl boy

फ़र्क़

लड़कियों के पैदा होने वबाप के लिए चिंता का बीजबोनेकी वजहसमाज द्वारा खाद पानीदहेज के रुप में जड़ों में डाला जाना हैक्योंकि जड़ें खाती हैं।पूरा पेड़ लहलहाता है।बाहर से भले ही पिता मुस्कुराता हैपर अंदर ही अंदर टूटता चला जाता है।शिकायत है तो सिर्फ पढ़े-लिखे लोगों सेक्योंकि यही समाज, दहेज Read more

introspection

आत्ममंथन

मूल्यहीनता की छायाऔर भ्रष्टाचार का धूप हैजाने क्यूं !आजकल आईना चुप हैहर बात एक बिंदु पर आकरसलट जाता हैइसीलिए आईना टूटता बिखरता तो हैसच दिखाने और कहने का साहस भी है उसमेंपर हवा के सानिध्य में आते हीपलट जाता हैजब तक हम यह सोचते हैं कि इसके पीछे कौन है?तबतक Read more

capitalism

पूँजीवाद टूटेगा

उन्हें रचने दो साज़िशऔर बनाने दो चक्रव्यूहअब अभिमन्यु नहीं मारा जाएगा और न ही द्रोणाचार्य एकलव्य का अंगूठा ले पाएंगेअब वृहन्नला भी संसद तक पहुंचेंगेशस्त्र समर्पण के प्रति न कोई भीष्म प्रतिज्ञा होगी और न ही होगा महाभारतजातिगत वर्ग संघर्ष की बात भी निरर्थक हैहाँ जो सोचते हैं अर्थ के Read more

love is why

न जाने क्यों……

न जाने क्यों, मैं फिदा हूं, उसकी चाहत का. ना जाने क्यों, मैं दीवाना हूं, उसकी चाहत का. हर – दम मैं चाहता हूं कि, वो न आये, इन खयालों में, मगर,वो आ ही जाती है, मेरे इन सवालों में. न जाने क्यों,मै….. बहुत प्यार करती थी, सिर्फ मुझ पर Read more

city

गांव या शहर?

वो एक मानव ही था,जो सड़क से जा रहा था.आसमान की तरफ देखते हुए,क्या इतने ही तारे हैं?जितने की इन ऊंची इमारतों,पर जगमगाती हुई रोशनिया. वो भागता है,उसके पीछे आने वाली भीड़ से,नहीं मैं नहीं भाग सकता,वो रुक जाता है, मगर नहीं,वो रुक भी नहीं सकता. सोचता है,क्या मैं, नहीं Read more

heaven

चर्ख

इस दर्द भरे दिन की शाम नहीं है,इस आगाज़ का अंजाम नहीं है। ऐ चर्ख तूने लूट लिया सब कुछ मेरा,फिर भी तुझको इत्मीनान नहीं है. चैन-ओ-करार लूटा, अब जी चाहिए,क्या ज़रा भी दीन-ओ-ईमान नहीं है, कह दो दिल की तमाम नफरतों सेचली जाएँ ये उनका मकान नहीं है जो Read more

smile

तबस्सुम

बिस्मिल हुआ है दिल निगह की मार से,नोक दिख रही है तीर की जिग़र के पार से जब से मारा है उन्होंने तबस्सुम फेंक करतब से रहने लगे हैं हम कुछ बेक़रार से इस क़दर खाया है धोका तेरे अहद परभरोसा उठ सा गया है लफ्ज़ ऐतबार से ख़ुदा जाने Read more

beautiful girl

दीदार

जब से उनका दीदार हुआ है,फ़ना चैन-ओ-करार हुआ है। गुल ही गुल हैं ता-हद्द-ए-नज़र,हर तरफ गुले गुलज़ार हुआ है। कुछ नज़र नहीं आता उनके सिवा,ये  अब  कौन सा आज़ार हुआ है। जिस ख़त में मेरे  असरार बन्द थे,वो आज रक़ीब का अख़बार हुआ है। अब तो ज़ब्त ने भी साथ Read more

मजबूरी

मराठी, बांग्ला, अंग्रेजी बोले निजा मज़बूरी में,हमनी के परान बसेला आपन ठेठ भोजपुरी में. हाथे सतुआ साने वाला, फंसल बा कांटा छुरी में,कुर्सी से बन्हाईल बानी, नीके खेलत रहनी धूरी में. सादगी में भी मजा रहे, दिमाग ना खटे फितूरी में,आ के इहवाँ लागल बानी शो ऑफ के मजदूरी में. Read more